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बरमूडा ट्रेंगल! दुनिया के उन अनसुलझे रहस्यों में से एक। जहां जब भी कोई जहाज उस के नजदीक या ऊपर से गुजरा है वापस नहीं लौटा। वह जहाज कहाँ गए? और उनमें सवार यात्रियों का क्या हुआ? इसका कभी कोई सुराग तक नहीं मिल सका। यहाँ तक कि उन जहाजों का मलवा तक नहीं मिल पाया। इस लिए सौ साल में यहाँ हज़ार से भी ज्यादा हवाई और समुद्री जहाज रहस्यमय तरीके से गायब हो चुकें हैं
सन 1881 में एक अमेरिकी जहाज एलन ओस्टन न्यूयॉर्क से लंदन जा रहा था। एटलांटिक ओशन में बरमूडा ट्रेंगल के पूर्व की ओर उन्हें एक भटकी हुई शिप मिली। उस शिप को अपने साथ ले जाने के लिए कुछ क्रू मेंबर्स उसमें सवार हो गए। पर इस सफ़र के बीच में ही दोनों जहाज एक दूसरे से अलग हो गए। और जब वह जहाज वापिस मिले तो शिप में सवार क्रू मेंबर्स गायब हो चूके थे।
उसी शाम एक सर्च प्लेन को उसी एरिया में भेजा गया। इसमें तेरा क्रू मेंबर सवार थे। लेकिन take off के सत्ताईस मिनट बाद ही उस प्लेन का भी संपर्क टूट गया। और वह हमेशा के लिए गायब हो गया।बरमूडा ट्रेंगल का सबसे लेटेस्ट इंसिडेंट है। 15 मे 2017 का। जिसमें एक प्राइवेट प्लेन में चार लोग सवार थे। पर जैसे ही प्लेन चौबीस हजार फूट के उपर पहुंचा पायलट का मियामी कंट्रोल टावर से रेडीओ सिग्नल टूट गया। और वह रडार से रहस्यमय तरीके से गायब हो गया।
North Atlantic ocean का यह हिस्सा जो बरमूडा,फ्लोरिडा और पोटोरिका को जोड़ता है। ट्रैवल ट्रेंगल से भी जाना जाता है। और हर साल यहां चार से पांच जहाज रहस्यमय तरीके से गायब हो जाते हैं। बरमूडा ट्रेंगल के बारे में लोगों का कहना है, कि उन्हें यहां आसमान में कुछ अजीब लाइट चमकती दिखती है। और इसके चलते कुछ लोगों का मानना है कि यहाँ एलियन exist रखते हैं। लोगों का तो यह भी मानना है कि यह जगह एक पोर्टल यानी द्वार है। जो आपको दूसरे डायमेन्सेन्स में ले जाती है। पर वैज्ञानिकों ने इस मिस्ट्री को सौल कर दिया है।
वैज्ञानिकों के रिसर्च के अनुसार इस जगह मैग्नेटिक एनप्लीज है। जिससे मैग्नेटिक कंपास काम करना बंद कर देते हैं। और लोग रास्ता भटक जाते है। और इसे एक टाइप का कोरा यानी इलेक्ट्रिक फौग भी क्रिएट हो जाता है। जो प्लेन यानी जहाज के साथ चिपक जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है जहाज कोरे में नहीं बल्कि जहाज कोहरे के साथ चलता है।
कोलारॅडस स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक यह 273 प्रतिघंटे की रफ्तार से माइक्रोबस नाम का चक्रवाती तूफान एक्साकनल राउंड में तब्दील हो जाता है। जिससे एक एअरबम भी कहा जाता है। और जब भी यह एक्साकनल क्लाउड फटता है और समंदर से जा कर टकराता है तो समंदर में काफी फिट ऊंची लहरें उठने लगती है। और वहाँ मौजूद हवाई और समुद्री जहाज एअरबम की तरफ खिंचे चले जाते हैं। इस एरिया में कोई भी डिफ्रीज और वैकेजस ना मिलने का कारण वैज्ञानिकों ने कलस् टीम को बताया है। जो एक नदी की तरह अटलांटिक समंदर में एंटर करती हैं। इसका तेज बहाव डूबे हुए जहाज को अपने साथ बहा ले जाता है। समंदर के बीच में इस बड़े से whole की गहराई है 28373 feet. यानी अगर कोई जहाज crash होकर नीचे गिरा तो वह इतनी गहराई में पहुँच जाएगा जिसे कभी ढूँढा नहीं जा सकता। आज हम विज्ञान के क्षेत्र में बहुत ही विकसित जरूर हो गए पर फिर भी हमारी पृथ्वी इतनी बड़ी है कि यहाँ कोई भी चीज़ आसानी से गुम हो सकती है। और हम उसे कभी भी ढूँढ नहीं पाएंगे।
- gyansanhita.com





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