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What is gravity (in hindi),gravity kya hai?gravity kya hoti hai?गुरुत्वाकर्षण बल किसे कहते हैं?गुरुत्वाकर्षण बल क्या होता? इन सारे सवालों के जवाब आज आप को मिलने वाले हैं।


What is gravity? गुरुत्वाकर्षण क्या है।
हम हमेशा से देखते आए है कि चीजे नीछे जमीन पर गिरती है ।जैसे बारिश की बूंदे जमीन पर गिरती है फिर इकठा होकर नदी में में मिलती है, बाद में नदी नीचे की और बाहके समुद्र में जा मिलती है । हम अगर किसी चीज को ऊपर की और फेंकते है तो ओ वापस धरती की और आ जाती है। सारे ग्रह सूरज अपनी अपनी कक्षाओं में सूरज का चक्कर लगाते है। और सारे सौरमंडल अपनी आकाशगंगा के केंद्र में स्थित श्यामविवर अर्थात ब्लैकहोल का चक्कर लगाते है। यह सब क्यों होता है? आखिर यह कोनसा बल है जो ब्रम्हांड की पूरी व्यवस्था बनाए रखता है?। इसका जवाब है "गुरुत्वाकर्षण बल" अर्थात ग्रैविटी।

 जिसके बारे में हमने स्कूल में भी पढ़ा है। पर सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि, आखिर ग्रैविटी है क्या? हम उसे महसूस तो कर पाते है पर देख क्यों नही पाते? क्या ग्रैविटी कोई पार्टिकल है? या बस एक भ्रम ! ऐसे अनगिनत सवाल है जो हर किसी के मन मे उठते है। अगर आपके मन में भी ग्रेविटी से जुड़ा कोई सवाल है तो बस आपको आपके हर सवाल का जवाब आज मिलने वाला है। आज आप एक कहानी के जरिए पूरी तरह से समझने वाले हो कि आखिर गुरुत्वाकर्षण बल है क्या? यह किस वजह से काम करता है? इस कहानी का शीर्षक है "the mystery of gravity"

तो इस कहानी की शुरूआत होती है 1661 से जब सर आइज़ैक न्यूटन अठारा साल के थे इसी उम्र में उन्होंने अपना घर छोड़कर केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी लंदन में एडमिशन लिया और पढ़ाई करने लगे, और फिर 1965 में लंदन में प्लेग नाम की बीमारी ने हाहाकार मचाया जिसमें लाखों लोगों की मौते होने लगे।इस बिमारी के डर से यूनिवर्सिटी भी बंद हो गयी इसी कारण न्यूटन को यूनिवर्सिटी छोड़कर वापस अपने घर लौटना पड़ा उनके पास अभी बोहोत समय था अपनी रिसर्च करने के लिए। उनके घर के पास एक सेब का बगीचा था ओ ज्यादातर इसी बगीचे में जाकर समय बिताया करते थे और इस ब्रम्हांड के रहस्यों के बारे में सोचा करते थे । कहा जाता है की जब एक दिन ओ सेब के बगीचे में बैठकर कुछ सोच रहे थे तभी उनके सामने एक सेब यानी एप्पल गिरा ।

इस छोटीसी घटना से ही उनके मन में एक सवाल ने घर कर लिया ओ सोचने लगे की "यह एप्पल नीचे ही क्यों गिरा?" ऐसा कोनसा बल है जिसने इसे नीचे की और खिंचा? बस यही सवाल थे जिन्होंने न्यूटन को अपनी जिंदगी का असली मकसद मिल गया था। ओ अपनी रिसर्च में जुट गए उन्हें यह तो पता था कि ऐसा कोई तो बल जरूर है जो किसी भी चीज को धरती की और आकर्षित करता है। उस बल को उन्होंने नाम दिया गुरुत्वाकर्षण बल। धीरे धीरे अपनी रिसर्च और मेहनत से यह भी जान चुके थे कि यह जादुई फ़ोर्स ब्रम्हांड में हर जगह पर है। उन्होंने यह भी समझा कि ओ ग्रैविटी ही है जो चाँद को धरती के चक्कर लगवाता है। इसी ग्रैविटी की वजह से ही सारे ग्रह सूर्य का चक्कर लगाते है। उन्होंने पूरी दुनियां को यह भी बताया कि कोई भी दो वस्तुए जिनमें द्रव्यमान है ओ एक दूसरे की और आकर्षित होगी। उन्होंने किसी भी वस्तु या ग्रह का का ग्रेविटेशनल एक्सेलेरेशन निकलने का एक सूत्र भी दुनिया को दिया जिसका इस्तेमाल हम आज भी करते है। इस तरह से खोज हुई इस ब्रम्हांड के एक अद्भुत रहस्य यानी गुरुत्वाकर्षण बल की। पर.....क्या यह कहानी यही तक है? नही! असली कहानी की शुरुआत तो अब होनेवाली है क्योंकि जब लोगों ने न्यूटन से पूछा कि ग्रैविटी किस वजह से कम काम करती है? इस को सुनकर न्यूटन ने अपने हाथ खड़े कर दिए।क्योंकि वह यह तो जानते थे ग्रैविटी काम तो करती है। सारी चीजें एकदूसरे की और आकर्शित तो होती है। पर ऐसा किस वजह से होता है? इसका जवाब ओ अपनी पूरी जिंदगी में कभी भी नही जान सके। जब उन्होंने फिर उनसे यह सवाल किया ग्रैविटी की वजह से कम करती है। तब उन्होंने लोगों से कहा कि यह एक मिस्टीरियस यानी रहस्यमयी फ़ोर्स है जो प्रकृति में अपने आप ही काम करती है।। इसीलिए हमने इस कहानी का शीर्षक रखा है the mystery of gravity.

पर न्यूटन ने जो जवाब दिया था ओ अधूरा था। करीब 200 साल बाद जाकर "अल्बर्ट आइंस्टीन" ने हमें बताया कि ऐसा क्यों होता है?

  उन्होंने कहा कि स्पेस ओर टाइम यानी समय और अंतराल उस फैब्रिक में आपस में जुड़े होते है जिसे स्पेस-टाइम कहते है।  आइंस्टीन मानते थे कि स्पेस-टाइम एक फैब्रिक यानी कपडे की तरह होता है जो मुड़ सकता है। और उससे होने वाला distortion यानी मुड़ाव ही ग्रैविटी है। कहने का मतलब यह है कि अगर हम कीसी कपड़े पर कोई ज्यादा घनत्व वाली जिच रखदे तो वह कपड़ा उस जगह पर एक गढ़े के आकार में नीचे की तरफ मुड़ जाएगा जैसे आप इस तसवीर में देख सकते और हम कोई कम द्रव्यमान वाली चीज को उसी फैब्रिक पर रखदे तो वह कम द्रव्यमान वाली चीज उस ज्यादा द्रव्यमान वाली चीज की तरफ ढलान के कारण आकर्षित होगा

 । और इसेही आइंस्टाइन ने ग्रैविटी कहा । और अपने सापेक्षता के सिद्धांत से यह साबित कर दिया। हमें आशा है कि अब से जुड़े हर सवाल का जवाब आपको मिल चुका होगा? पर शायद आप को यह समझ में नहीं आया होगा कि ये स्पेस-टाइम क्या है? इसका जवाब आप को अगले लेख में मिलने वाला है? तो बस बने रहिए हमारे साथ!
                      -धन्यवाद

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