Big-Bang theory
आज से करीब 13.8 अरब साल पहले घटित हुई एक ऐसी घटना, जिसने जन्म दिया इस ग्रह-तारों वाले अनंत ब्रम्हांड को जिसे हमने नाम दिया द बिग बैंग(the big bang theory)।
इससे पहले कुछ भी नही था। था तो बस अंधकार और सन्नाटा....पर क्या पता यह भी था या नही? उस वक्त ब्रम्हांड में न स्थान था ना दिशा, न प्रकाश था और न ही गति। physics यानी भौतिकी के नियमों का भी कोई अस्तित्व नही था। पर उसी अनंत की गहराइयों में एक ऐसा बिंदु था, जो असीम ऊर्जा से भरा हुआ था। आकार में यह एक परमाणु से भी अरबो गुना सूक्ष्म था पर आगसे भी खरबो गुना उष्ण था। इसके घनत्व और वस्तुमान कि तो हम कल्पना भी नही कर सकते,क्योंकि इसी एक बिंदु ने हमारे अनंत ब्रम्हांड को जन्म दिया। यह ग्रह-तारे, आकाशगंगाये और जो कुछ भी हम जानते है और जो कुछ भी नही जानते इसकी उत्पत्ति इसी एक बिंदु से हुई। आजतक जितनी भी घटनाए हो चुकी है और जो बाकी है,खुद समय की भी शुरुआत इसी एक बिंदु से हुई। आप,मैं और जो कुछ भी आज अस्तित्व में है उस वक्त एकहि जगह एकहि बिंदु में समाहित था।
करीब 13.8 अरब साल पहले इस सूक्ष्म बिंदु में एक भयानक महाविस्फोट हुआ।और यह ब्रम्हांड प्रचंड ऊर्जा के साथ अपने अस्तित्व में फैल गया। यह ब्रम्हांड की पहली और सबसे बड़ी घटना थी। इसी के साथ शुरुआत हुई स्पेस-टाइम यानी समय और अंतराल की। ब्रम्हांड की शुरुआत हुए बस एकहि सेकंद बीत गया था कि ब्रम्हांड में भयानक परिवर्तन शुरू हो गए। प्रकाश की गति से भी सेकड़ो गुना तेज गति से यह ब्रम्हांड फैलने लगा। जब बिग-बँग हुआ तब ब्रम्हांड में सिर्फ ऊर्जा थी,pure energy यानी शुद्ध ऊर्जा। यह वही ऊर्जा है जिसका उपयोग हम हर पल करते है। चाहे हम सांस भी क्यों न ले रहे हो। कुछ सेकंद होते होते ब्रम्हांड का तापमान 1000000000000(दस खरब) डिग्री सेल्शियस तक कम हो गया। ब्रम्हांड के फैलने की गति भी थोड़ी कम होगयी। अब ब्रम्हांड में ऊर्जा से पदार्थ बनना शुरू हो गए। क्वार्क,इलेक्ट्रान,फोटॉन जैसे सबएटॉमिक पार्टिकल्स यानी मूलकणों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। असल बात बताए तो कोई भी नही जानता कि ब्रम्हांड में पदार्थ आया कहा से, पर कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसाही कुछ हुआ होगा।
यही पदार्थ का शुरुआती रूप था। matter यानी पदार्थ के साथ कुछ मात्रा में antimatter यानी प्रतिपदार्थ भी बनने लगा। पदार्थ और प्रतिपदार्थ एक-दूसरे के विपरीत होने के कारण जैसेही पास आते एकदूसरे को खत्म कर देते थे।
1 मिनट होते होते ब्रम्हांड में से सारा प्रतिपदार्थ खत्म होगया। अब बचा था पदार्थ और ऊर्जा जो लगातार फैल रही थी।इसके फैलाव से ब्रम्हांड का तापमान और कम होने लगा। ब्रम्हांड में मौजूद क्वार्क एक दूसरे के साथ मिलकर प्रोटोन और न्यूट्रॉन बनाने लगे।
17 मिनट बाद- ब्रम्हांड का आकार काफी बढ़ गया था। तापमान भी कम होगया था । ब्रम्हांड में अब एक प्रक्रिया शुरू हो गयी, जितने भी प्रोटॉन्स और न्यूट्रॉन्स बन रहे थे वह आपस में मिलकर nuclei अर्थात अनुकेन्द्रक बनाने लगे । इसी प्रक्रिया को हम nucliosynthyasis भी कहते है। यह प्रक्रिया लगातार चलती रही।
लगभग तीन लाख साल बाद ब्रम्हांड में मौजूद इलेक्ट्रोन्स अनुकेन्द्रक के और आकर्षित होने लगे और उनसे मिलकर atom यानी परमाणु बनाने लगे।
इस तरह ब्रम्हांड को अपना पहला अनु मिला जो था hydrogen (हाइड्रोजन)। इसी के साथ और तीन अनु बन गए थे जैसे:-हीलियम,लीथीयम और ड्यूटीरियम। अबतक आपने जो पढ़ा यह सब 20 करोड़ साल तक चला। इन्ही 20 करोड़ सालों को cosmic darkage भी कहते है। क्यों कि तबतक ब्रम्हांड में प्रकाश का कोई अस्तित्व ही नही था।
20 करोड़ साल बाद-ब्रमांड में एक force, एक बल काम करने लगा। जिसे हम कहते है "गुरुत्वाकर्षण बल"। इसी गुरुत्वाकर्षण के कारण ब्रम्हांड में धूल की तरह बिखरे हाइड्रोजन और हीलियम के अनु एक-दूसरे की और आकर्षित होकर भारी मात्रा में जगह जगह इक्कठा होने लगे। और जहाँ जहाँ यह इक्कट्ठा होने लगे वहां वहां केंद्रीय गुरुत्वाकर्षण बल यानी कि "center of gravity" की वजह से दाब (pressure) बढ़ने लगा। दाब से तापमान बढ़ने लगा। ब्रम्हांड में और एक प्रक्रिया शुरू हुई "nuclear fusion" यानी आण्विक संश्लेषण। इसी के साथ ब्रम्हांड में प्रकाश की पहली किरण ब्रम्हांड में फैल गयी। cosmic darkage खत्म होगया। ब्रम्हांड को अपना पहला तारा मिल गया, यह यूनिवर्स प्रकाशित होने लगा। हजारों तारे बन गए। तब इतने तारे पर्याप्त थे ब्रम्हांड को प्रकाशित करने के लिए, क्योंकि तब का ब्रम्हांड आज की तुलना में बहूत छोटा था। और अलग भी था क्योंकि, उस समय ब्रम्हांड में सिर्फ तारे थे, और कुछ नही उस वक्त न तो कोई आकाशगंगा थी और ना ही ग्रह-तारे। और यह सबकुछ बनता भी कैसे?? इसके बनने के लिए जिन भारी तत्त्वों की जरूरत थी, जिन मुलद्रव्यो की जरूरत थी, उनका निर्माण अबतक नही हुआ था। ब्रम्हांड में सिर्फ 4 प्रकार के अनु थे जो हमने आपको बताए। अब पूरा ब्रम्हांड काफी शांत था पर अब भी एक काम लगातार जारी था। ब्रम्हांड के सारे शुरुआती तारे भारी मात्रा में हायड्रोजन जलाकर भारी तत्वो का निर्माण कर रहे थे।जैसे कैल्शियम, आयर्न और ओ सारे मुलद्रव्य जो आप जानते हो। जिससे हमारा शरीर बना है।ये धरती बनी है। धीरे धीरे करोड़ो साल बीतते गए, समय बीतता गया और ब्रम्हांड के उन शुरुआती तारों का ईंधन यानी हीड्रोजन खत्म होने लगा। इसी कारण बिग बँग के 40-50 करोड़ साल बाद ब्रम्हांड के उन शुरुआती तारों में भयानक विस्फोट होने लगे। फिर एक बार ब्रम्हांड में अशांति फैलाने लगी। पूरा ब्रम्हांड धूल और गैस के बादलों से भर गया। पर इस बार की धूल थोड़ी अलग थी क्योंकि की अब ओ सारे तत्व ब्रम्हांड में मौजूद थे जिनसे आज के जैसा ब्रम्हांड बनाया जा सके ।
ग्रेविटी ने फिर से अपना जादू दिखाना शुरू किया,
सारि धूल और गैस जगह जगह कंप्रेस होने लगी ।
फिर से तारों का निर्माण शुरू हुआ, इस बार तारों के साथ जो भारी तत्व बच गए उनसे ग्रह भी बन रहे थे,उपग्रह भी बन रहे थे। सारे ग्रह अपने से ज्यादा द्रव्यमान वाले अपने तारों की कक्षा में चक्कर काटने लगे,और इस तरह ब्रम्हांड को अपनी पहली सूर्यमाला मिली। करीब एक अरब साल तक ऐसे करोडों सौरमण्डल बने।
करीब एक अरब साल बाद- गुरुत्वाकर्षण के कारण करोड़ों सौरमंडल समुदाय में रहने लगे। और जन्म हुआ पहली प्रोटोगेलैक्सि का। जो आकाशगंगा का शुरुआती रूप था। तब से लेकर आजतक खरबो आकाशगंगाये बनी। और इन्ही में से एक आकाशगंगा है दुग्धगंगा(milky way) जिसमे हम रहते है। लगभग 4-5 करोड़ साल पहले ऐसेही हमारे सौरमंडल का निर्माण हुआ। इसके बारे में किसी और लेख में जानेंगे। बस यही थी ब्रम्हांड की शुरुआत से लेकर अब तक कि कहानी। आपको यह लेख कैसा लगा नीचे कमेंट करें।
-धन्यवाद


1 Comments
Nice
ReplyDelete